Sunday, February 7, 2016

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Friday, February 5, 2016

Velentine day fir se aa rhaa hai ...

फिर से वेलेंटाइन डे आ रहा है ...
याद है जान...
जब वेलेंटाइन डे था,
हमारी जिंदगी में बहार लाया था..
तुमने अपनी सच्ची महोबबत का इज़हार किया था..
मेरे दिल को नये नये जज्बों से सेर सार किया था..
नये नये वादे थे , नये नये इरादे थे,
तुमने हमेशा मेरी वेलेंटाइन रहने का वादा किया था..
आज तुम मेरे साथ नही हो . 
फिर मुझे तुम्हारा वादा याद आ रहा है..
फिर से वेलेंटाइन डे आ रहा है...

Valentine Shayari

सोचा आप से बात करूँ.
फिर सोचा एक मुलाकात करूँ,
फिर सोचा क्यों ना इंतजार करूँ.
फिर सोचा क्यों ना एक काम करूँ,
एक प्यारा सा संदेशा आपके नाम करूँ
Happy Velentine Day 


Tuesday, February 2, 2016

Sad Shayri Hindi

इतना बुरा भी नही हूँ मैं..बस..
खुद को देख रहा था दूसरों की नज़रों से
 ए जिंदगी, ना हो उदास 
मुझे आदत है मुस्कुराने की ...


इन पलकों पे हज़ारों ख्वाबों का बोझ है..
अब याद ना आओ, सुलाने दो इन्हें...
मैं शख्स कैसा भी हूँ..
पर ख्याल सबका रखता हूँ...
ना जाने कब उठकर चले जाएँ दिलासे देने वाले..
यू देर तक रोना धोना भी तो ठीक नही..
वो इश्क ही क्या..
जिसे सबूत की दरकार हो ... 
अरमानों को दिल में सजाकर रखता हूँ. 
हसरतें रखूँगा तभी तो पूरी होगी ना..
मैं तो कब का बीत गया..
तुम हो. जो मुझमें जी रहे हो ...

Two Line Shayri Hindi

वो मुझे हाथो की लकीरों में ढूँढती रही,
पगली एक बार दिल में झँकती, मैं ही था


किस्सा अजीब है जिंदगी का...
हाल अजनबी पूछ रहे हैं, ओर अपनो को पता ही नहीं ..
सुकून .. जो तेरे अहसासों में है .
वो नींद में कहाँ.. 

छाँव में रखकर पूजा करो ये मोम के बुत,
धूप में अक्सर अच्छे अच्छे नक्शे बिगड़ जाते हैं.
दुनिया से इस कदर रूबरू हुए है हम
खवाब भी आते है तो हक़ीकत की तरह...
हम जो तुम्हे नवाजते हैं, गुमा ना कर बैठना
आजकल खिताब वापिस भी हो जाते हैं..

सूरत परखने को तो आईने बहुत मिल जाते है बाजार में, 
सीरत परख सके, उस नज़र का इंतजार है...

Sunday, January 31, 2016

चलता रहता है Chalta Rahta Hai

हिन्दी कविता जगत की शान, कवि ड़ा. कुमार विश्वास जी की एक कविता..


चलता रहता है ...

रूह जिस्म का ठोर ठिकाना चलता रहता है।
जिन मारना खोना पाना चलता रहता है।।
सुख दुःख वाली चादर घटती बढ़ती रहती है।
मोला तेरा ताना बाना चलता रहता है।।
चलता रहता है।।


जिन नजरो ने रोग लगाया गजलें कहने का
आस तलक उनको नजराना चलता रहता है।।
लोग बाग भी वक्त बिताने आते रहते है।
अपना भी कुछ गाना वाना चलता रहता है।।
चलता रहता है।।






कुमार विश्‍वास जी की अन्य कविताओ को पढ़ने के लिए जुड़े रहें...

इतनी रंग बिरंगी दुनिया : Kitni Rang Birangi Dunia

हिंदी कविता जगत के महान कवि डॉक्टर कुमार विश्वास जी की ख्याति से तो आज पूरा विश्व रूबरू है। उनकी प्रसिद्ध कविताओ का पूरा भारत दीवाना है। इसी कड़ी में पाठको की बढ़ती मांग पर हमारी टीम प्रस्तुत कर रही है कुमार साहब की एक अमूल्य कृति : 

इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये।
हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये।।
इतनी रंग बिरंगी दुनिया...

ऐसे उजले लोग मिले जो, अंदर से बेहद काले थे।
ऐसे चतुर मिले जो मन से सहज सरल भोले भाले थे।।
ऐसे धनी मिले जो कंगालों से भी ज्यादा रीते थे।
ऐसे मिले फ़क़ीर जो सोने के घट में पानी पीते थे।।
मिले परायेपन से अपने, अपनेपन से मिले पराये।
हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये।।
इतनी रंग बिरंगी दुनिया..
.
जिनको जगत विजेता समझा, मन के  द्वारे हारे निकले।
जो हारे हारे लगते थे, अंदर से ध्रुव तारे निकले।।
जिनको पतवारें सौपी थी, वो भंवर के सूदखोर थे।
जिनको भंवर समझ डरता था, आखिर वही किनारे निकले।
इतनी रंग बिरंगी दुनिया...

वो मंजिल तक क्या पहुंचेगे, जिनको खुद रास्ता भटकाए।
हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये।।
इतनी रंग बिरंगी दुनिया...


कुमार जी की कवितायेँ व् कवी सम्मलेन पढ़ने के लिए जुड़े रहे। 

Thursday, January 15, 2015

मेरा बचपन ( आत्मकथा )

बात उन दिनो की है.. जब गाँव मे बचपन बीत रहा था..
मैं ओर मेरा परम मित्र ओर चचेरा भाई संजय..
अब तो फ़ेसबुक पे नाम भी बदल लिया है..
संजय अब बन गया है आकांशु अरोड़ा..
हहेहेहेहहेः..

सुबह से शाम तक साथ रहना..
वो स्कूल मे एक क्लास मे एक साथ बैठना..
शायद 4 की उमर रही होगी तब हमारी
मुझे आज भी याद आता है..
वो भुआ के घर जाकर गन्ने माँगना..
तुम्हारा भुआ से कहना.. एहनु वी एक गन्ना दे दो..
ओर फूफा जी का मुझे गन्ने के साथ लड्डू देना..
मुझे आज भी याद आता है..
वो ह्मारे चबूतरे पे बैठकर गन्ने चूसना ..
वो मेरे घर मे लगे गेंदे के फूल..
वो खेत मे जाकर बेर तोड़ना
मुझे आज भी याद आता है..
वो शाम को गाँव घूमने जाना
तुम्हे याद है.. एक बार तुम मुझे सरकारी स्कूल के पास छोड़कर अकेले घर आ गये थे.. ओर मेरे घर वालो के पूछने पे की सौरभ हाँ है.. तुम्हारा जवाब..
हाहहहाहा...
हाहहहहाहा..
तुमने बहुत ही भोलेपन से कहा..
सौरभ तो मर गया..
हहेहेहेहहे..
मुझे आज भी याद आता है..
वो मेरे खेत मे मेरी 2*2 की क्यारी
ओर उसमे उगाए मेरी 8-10 प्रकार की सब्जियाँ
ओर रोज शाम को अपना खेत देखने जाना..
मुझे आज भी याद आता है..
तुम्हे याद है.. एक बार हमने एक कुत्ते के पिल्ले को मेरे घर के सामने बबूल के पेड़ के नीचे बाँध दिया था..
ओर शाम तक उसे खिलाते पिलाते रहे..
हुउऊुुुुुुउउ..
ह्मारा डोगीइिईईईईईईई
हहेहहे
मुझे आज भी याद आता है..
शायद किस्मत को हमारा बचपन इतना ही मंजूर था.. तुम शहर आ गये..
.
.
ओर वो गाँव के बचपन के दिन वही ख़त्म ..
शहर की तेज रफ़्तार जिंदगी मे हमारा बचपन खो गया....
आज भी तलाश करता हूँ अपने अंदर वो नन्हा सा बच्चा...
किसी को मिले तो ज़रूर बताना..
दोस्तो पहली बार अपनी जिंदगी के कुछ पन्ने खोल रहा हूँ. .
अपनी प्रतिक्रिया देते रहें..
आपका मित्र सौरभ..

Tuesday, July 29, 2014

आज कल मोहब्बत फेक हैं

                 आज कल मोहब्बत फेक हैं, क्यूंकि आज की मोहब्बत फेसबुक और व्हाट्सअप हो गई हैं l यहाँ रोज नित नए चेहरों से मुलाक़ात हो जाती हैं धीरे - धीरे दोस्ती और फिर मोहब्बत की शुरुवात हो जाती हैं l फिर नम्बरों का आदान प्रदान होता हैं और पूरी रात जाग कर मोहब्बत के पाठ पढ़े जाते हैं l वादों का सिलसिला चलने लगता हैं, साथ निभाने के की कसमें खाई जाती हैं l

              फिर धीरे धीरे रिश्तो में शक और जरूरत का नाम आ जाता हैं, और रिश्ते टूट कर चकनाचूर हो जाते हैं l फिर दोनों एक दुसरे से बात करना बंद कर देते हैं लड़का या लड़की एक दुसरे को ब्लोक कर देते हैं और फिर एक दुसरे को भूल कर और नयें के साथ शुरू हो जाते हैं l वो ही कर्म चलता हैं और मोहब्बत तमाशा बन जाती हैं l

                      कुछ सच्ची मोहब्बत करने वाले भी होते हैं उनमें कुछ शराबी तो कुछ देवदास तो कुछ शायर बन जाते हैं और कुछ इतने निराश हो जाते हैं खुद को खत्म कर लेते हैं पर ये वो होते हैं जो सच्चे दिल से प्यार करते हैं पर आज के युग में सच्ची मोहब्बत कभी किसी को रास नहीं आती हैं और यही आज का सच्च हैं किसी को हद से ज्यादा चाहना खुद को बर्बाद करने के सिवा कुछ नहीं हैं l

                  मोहब्बत पहले के जमाने में होती थी l क्यूंकि उस वक्त फेसबुक, व्हाट्सअप नहीं थे l उस वक्त चिठ्ठिया लिख कर मोहब्बत का इकरार होता था और वो प्यार दिल से निभाया जाता था पर आज कल प्यार दिल से नहीं दिमाग से चलाया जाता हैं l किसी को खोने का किसी को गम नही होता क्यूंकि सबके पास न्यू ओपोर्चुनिटी जो तैयार रहती हैं l

ये कैसी मोहब्बत हैं इस युग में कुछ दिन अपने दिल में उसे शहंशाह या रानी बनाके रखते हैं और जब वो दिल से उतर जाता हैं तो उसे गाली गलोच, उसकी बुराईयाँ और उसको बर्बाद करने की वजह ढूंडते रहते हैं l जिसके लिए कभी दुआ में हाथ उठते हैं उसी के लिए बर्बादी के सपने देखने लगते हैं l यही हैं आज की मोहब्बत और आज का दर्द - ए - इश्क l

            आजकल मोहब्बत मजाक हैं कर तो सभी लेते हैं निभाने के लिए वक्त किसी के पास नही हैं कोई दो पल साथ नहीं चल पाता क्यूंकि सबको मोहब्बत नहीं टाइमपास चाहिए l कोई अगर किसी से सच्चा प्यार करने तो उसकी मोहब्बत का मजाक बना दिया जाता हैं l अरे किसी से रिश्ता नहीं निभाओ तो कोई बात नहीं पर उसे घुटन भरी जिन्दगी देने की इजाजत किसने दी हैं अरे कभी उसी की ख़ुशी के लिए आप सब कुछ करने को तैयार होते हो और आज वो रोता हैं तो कोई फर्क नही पड़ता l क्या यही हैं मोहब्बत ?

            पर सही मायनें में तो मोह्ब्ब्त वो शब्द हैं जिसको आज तक परिभाषित नहीं कर पाया l जिसमें किसी को नजरों में बसाते हैं सीधा दिल में उतारने के लिए l जिसमे जरूरत शब्द नहीं आता l जिसमें पैसा और हवस जैसे शब्द दूर दूर तक नजर नहीं आते हैं और शक जैसा शब्द मन में भी नहीं आता और आ भी जाएँ तो उसे दूर करने के लिए खुद को समझाया जाता हैं l मोहब्बत खुदा हैं कोई क्रिकेट या कैंडी क्रश का गेम नहीं हैं की जब तक मन किया खेला और जब उभ गए तो बंद कर दिया l

            पहले दो अजनबी मिलते हैं फिर बातें होती हैं अजनबी से दोस्ती का रिश्ता शुरू होता हैं फिर एक दुसरे की पसंद ना पसंद को जाना जाता हैं फिर धीरे - धीरे मोहब्बत हो जाती हैं पर फिर क्या ? मोहब्बत के बाद क्या ? अगर मोहब्बत चली तो जिन्दगी भर साथ निभाया और मोहब्बत खत्म हुई तो फिर वही शुरुवात में आकर फिर अजनबी बन गए l क्या इसी का नाम मोहब्बत हैं ?

•√ सच्ची मोहब्बत वालों के लिए :-
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            किसी से मोहब्बत करों तो निभाने के लिए करों ना की मनोरंजन के लिए l शायद तुम उसे छोड़कर खुश रह सको, पर उसकी जिन्दगी में घुटन और तन्हाई और जो तड़फ होगी उसकी वजह सिर्फ और सिर्फ तुम रहोगे l इसलिए अपनी ख़ुशी के लिए दूसरों की ख़ुशी तबाह करना ये इंसानियत नही हैं..

•√ टाइमपास मोहब्बत वालों के लिए :-
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          जितना टाइम पास किसी के साथ करना हैं कर लो एक दिन आप खुद सबके लिए टाइमपास बन जाओगे l और उस दिन समझ आएगा मोहब्बत क्या हैं l

•√
वाह री मोहब्बत तेरे अजब गजब खेल निराले,
जिनको मिल जाएँ मोहब्बत वो किस्मत वाले,
और जिनको मिले मोहब्बत में, दर्द ए तन्हाई,
उनके हलक से नही उतरते. , रोटी के निवालें..

Wednesday, March 26, 2014

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है

डॉक्टर कुमार विश्वास जी की अब तक की सबसे ज़्यादा पसंद की जाने वाली कविता...

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!

मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!


यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!

मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!
भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!

अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!

कुमार विश्‍वास जी की अन्य कविताओ को पढ़ने के लिए जुड़े रहें...

बदलते एहसास ......!!!!

मेरे घरों के तालो का कुछ चोर बेनागा हिसाब रखते हैं ..
ये कलयुगी बगुले हैं , हंस मारके मोती निगलने की चाह रखते हैं ...
कुछ छिछोरे व्यंग उपदेश लगते थे हमको गीता का..
कटघरों में खड़ी हैं राधाएँ आज, सब कृष्ण दोधारी नक़ाब रखते हैं...!!(27- Nov-2013)


क्या लिख डालूं की तुझे महसूस हो दर्द-ए-उलफत करीने से..
हर हर्फ का असर यूँ हो की खून निकले तेरे भी सीने से..
आके देखे मेरे बसेरे पे बसेरा आज बाजो-चीलो का है...
रोशनी खफा है मेरे आँगन से , सिर्फ़ अंधेरा झाँकता है जीने से.!!(20-Nov-2013)

बहुत देखे थे तुझ जैसे बदन को नोचने वाले...
बहुत देखे थे तुझ जैसे बदन गोरे पर दिल काले...
तेरी आयद को सबसे जुदा , था मेहरे- खुदा माना ..
फफोले पड़ गये है अब लबों पे , दिल पड़े छाले..!!!(15-Nov-2013)


फन उठाते सान्पो को आस्तीनो में छुपाया मैने..!!
अंधेरो के माथो पे , सुर्ख सिंदूर लगाया मैने...!!
मरते मरते भी , गंगाजल नही शराब माँगी..!!
बड़ी तरकीबों से तेरा नाम भुलाया मैने...!!(11-Nov-2013)


पेशानी के पसीने को पानी समझ लिया...
मेरे चुप रहने को मेरी नादानी समझ लिया...
राहे उल्फ़त का जनाज़ा ज़रूर उठा था उस रात...
जब उदुन के बाशिन्दो को मैने "ज्ञानी" समझ लिया...!!(9-Nov-2013)


रोशनी के गर्म थपेड़े , आँख बंद कर लेने से थमे हैं कहीं???
कुछ पन्ने फाड़ लेने से जिंदगी की किताब बदली है कहीं??
कुछ नही बदलता...कुछ भी नही... सिवाय.....
रिश्ते..कुछ टीस के साथ ही सही..रिश्ते बदल ही जाते हैं....!!(29- August-2013)


ये जो उनी स्वेटर सी उलझी गमगीन तनहाईयाँ थी वीरान अंधेरों में दुबकी दुबकी..!!
इनसे कह दो की सरगोशियाँ मिली हैं हमें, इश्के-गरमाइयाँ मिली हैं हमें...!!(1-July-2013)


मैं बिक रहा हूँ टुकड़ा टुकड़ा होकर...
खरीददार मिले तो, बिना मोल बिक जाऊं..
बेखौफ समंदर तो हूँ मैं अविरल , अनंत...
तू इशारा कर तेरी पलकों में छिप जाऊं...!!!(3-May-2013)


देखो तो मेरे मकान की छत का एक कोना गायब है दोस्त...
शायद कल तूफान ज़ोरों से बहुत आया है...
अरे गायब तो वो मनी प्लांट की बेल और वो तुलसी का पौधा भी है ,
जो तब लगाया था जिस दिन देखा था उसे पहली बार..!!!(6 -Nov-2013)

उसके हिस्से से मेरी बदसलूकियाँ छीन कर , मैने उसे किसी और के नाम लिख दिया ....!!!!(25-March-2014)

Thursday, January 2, 2014

"Vidaai"

Jaan se bhi zyada tujhe pyar kiya hai maine...
Umr bhar isi din ka intzaar kiya hai maine....

Tu aaj ke din labo'n ki hansi kam na kar...
Meri gudiya! Aaj hargiz aankh nam na kar....

Khusiyo'n bhari ye raat, mubarak ho tujhe....
Naye jeewan ki shuru'aat, mubarak ho tujhe....

Tere baghair ab to ye ghar bhi paraaya hoga...
Ab is ghar mein bas teri yaad ka saaya hoga....

Maa-baap ye jeewan me ye din bhi aata hai....
Jigar ka tudka hi ek din door ho jata hai....

Naye rishton ki ye sauGaat mubarak ho tujhe....
Naye jeewan ki shuru'aat mubarak ho tujhe.....

Saturday, July 27, 2013

EK FAUJI KI BIWI KA USKE NAAM EK KHAT......

jab se gye ho dur mera dil nhi lagta...
tumhare saye ka bharam hai roto ko mujhe thagta...

tumhare bin mai ek pal bhi chain se so bhi nhi pati...
sab ke samne to sharam se ro bhi nhi pati...

desh ki wafadari me tum kahi mujhko na bhula dena...
intzar karwate karwate kahi apni jaan ko hamesha ke liye na sula dena...

mai laaj ke mare kisi se apna dard kah nhi pati...
magar rab ki kasam ab tumhari judai bhi aur sah nhi pati...

tumhe dekhe huye aaj pura saal guzar gya...
tumhare intzar me diwali gyi sard raate gyi ke aab to sawan bhi guzar chla...

bache bhi ab tumhe dekhne ki zid karte hai...
tumhi aakar inhe danto ke aab ye mujhse nhi darte hai...

maa ki halat bhi ab kuchh thik nhi rahti...
baba ko bhi bas tumhe milne ki hai dhun chdhhi rahti...

ke ek baar waqt nikal kar hmare pass chle aao...
desh ki seva me "fauji babbu" apne pariwar ko to mat bhulao.....

Saturday, May 25, 2013

Gareeb ladki

तीन वर्षीय बच्ची किताब खोलकर पढ़ने लगी, "अ से अनाल... आ से आम...

एकाएक उसने पूछा, "पापा, ये अनाल क्या होता है?"

"यह एक फल होता है, बेटे।" मैंने उसे समझाते हुए कहा, "इसमें लाल-लाल दाने होते हैं, मीठे-मीठे!"

"पापा, हम भी अनाल खायेंगे..." बच्ची पढ़ना छोड़कर जिद्द-सी करने लगी।

मैंने उसे डपट दिया, "बैठकर पढ़ो। अनार बीमार लोग खाते हैं। तुम कोई बीमार हो! चलो, अंग्रेजी की किताब पढ़ो। ए फॉर ऐप्पिल... ऐप्पिल माने...।"

सहसा, मुझे याद आया, दवा देने के बाद डॉक्टर ने सलाह दी थी– पत्नी को सेब दीजिए, सेब।

और मैं मन ही मन पैसों का हिसाब लगाने लगा था। सब्जी भी खरीदनी थी। दवा लेने के बाद जो पैसे बचे थे, उसमें एक वक्त की सब्जी ही आ सकती थी। बहुत देर सोच-विचार के बाद, मैंने एक सेब तुलवा ही लिया था– पत्नी के लिए।

बच्ची पढ़ रही थी, "ए फॉर ऐप्पिल... ऐप्पिल माने सेब..."

"पापा, सेब भी बीमाल लोग खाते हैं?... जैसे मम्मी?..."

बच्ची के इस प्रश्न का जवाब मुझसे नहीं बन पड़ा। बस, बच्ची के चेहरे की ओर अपलक देखता रह गया था।

बच्ची ने किताब में बने सेब के लाल रंग के चित्र को हसरत-भरी नज़रों से देखते हुए पूछा, "मैं कब बीमाल होऊँगी, पापा?"

Monday, May 6, 2013

AKHIRI MULAKAAT......

Use din apni jaan ko main dhang se dekh bhi nahi paayaa thaa...
ki boli wo, 'ye hamaari aakhri.mulakaat hai,...
kal main kisi aur ki ho jaaungi, banke dulhan kisi aur ki,...
main tumse duur, bahut duur chali jaaungi,....

saath hamaaraa jo thaa bas yahin tak thaa,..
main kal tumhaare nazron se duur chali jaaungi,..
is chaand ko dekh lo dhang se tum aakhri baar,..
kal amawas hai, raat ke andhere me main kahin kho jaaungi,..

judaa hoke tumse, main jaane kis.jahaan me chali jaaungi,..
wo kasme, wo waade hamaare bas yahin tak the,..
nibhaane ke liye kuch rishtey, kuch rishton ko mai tod jaaungi,..
main tumhaari thi, ab kisi aur ki ho jaaungi,...

na karnaa yaad mujhe tum, naa aansoo bahaanaa,..
aa jaaye yaad kabhi to mujhe yaad kar muskuraanaa,..
main yeh soch ke khush ho jaaungi ki tum khush ho,..
jaanu, main nibhaa naaa saki, tum ye waadaa nibhaanaa,...

chaahe ho ghum hazaar, tum sadaa muskuraanaa'...
seene se lag gayi mere wo, kaske mujhe pakad ke...
aansoo pochhte huye apne, boli 'main khush hoon,..
na sochna ki main judaa ho ke.tumse dukhi hoon,..

sach kehti hoon jaanaa, main bahut khush hoon,..
achcha hai roz roz ka ye ronaa, ye jhagadnaa khatam ho,..
khush rahen mere gharwaale, aur main bhi rahun,..

maan li hai maine unki baat, main khush hoon,..
thaam lungi kisi aur ka haath, main khush hoon'...

fir bahut pyaar se mere gaaalon ko chumaa usne...
ek baaar nahi sau sau baar mujhe chumaa usne...
seene se lag ke mere kuch der.shaant rahi...



fir boli, 'waqt ho chukaa mujhe jaanaa hai,...
yahin tak thaa saath hamaaraa, mujhe jaanaa hai,...
jaake gharwaalo kaa saath mujhe nibhaanaa hai,...
tod chuki hoon rishtaa tumse, ye unhe bataanaa hai,...

jaanu, nibhaa naa saki saath tumhaara mujhe maaf karnaa,..
majboori hai meri, mujhe gharwaalo kaa saath nibhaanaa hai'...

bas aur kyaa.... rahaa nahi mere paas kuch kehne ko...
rahaa nahi kuch baaki aur mera sunne ko...

wo aakhri baar mere gale lag ke chali gayi us din...
wo chaandni mere zindagi ki kho gayi us din...
sach, fir uske baad amaawas hi rahaa har din....

yaad hai ab to bas uskaa wo rota huwaa chehraa...
aakhri baar mujhse milke jaataa huwaa chehraa...
bhoolaanaa bahut chaahaa maine use par bhulaa naa sakaa....

chaand thaa yaar meraa, chaand saa uska chehraa............@ssoouurraabbhh ddiiwwaannaa..

Saturday, March 9, 2013

Jab Ladki Apna Sab Kuch Chhod Kar Dusre Ghar Jaati Hai

http://www.facebook.com/KoiDivanaKahataHaiKoiPagalaSamajhataHai?ref=hlDekho Dosto Aaj Ye Kitna Ajeeb Manzar He...
Aaj Chhod Kar Jana Muje Khud Apna Hi Ghar He..

Sochti Hu Kyu Taqdeer Hamari Aesi Banayi He..
Ya Fir Ham Par Khuda Ka Ye Koi Karam He..

Jis Ghar Me Bitaya Bachpan Aur Jawani Apni..
Jis Ghar Se Judi Hamari Har Dhadkan He..

Aaj Usi Ghar Ko Alwida Kahe Ja Rahi Hu..
Chera Udaas Aur Aankhe Aansuo Se Tar He...

Wo Galiya Jaha Roj Me Sakhiyo Se Mila Karti Thi..
Aaj Wo Hasti Galiya Bhi Jese Suna Samunder He..

Wo Mere Bhai Jo Kabhi Mujse Roj Lada Karte The..
Aaj Unki Bhi Nazre Zuki Aur Aankhe Nam He..

Meri Maa Jo Haste Haste Meri Shadi Ki Baat Karti Thi..
Aaj Isi Din Par Aankho Ke Sath Sath Roti Uski Har Dhadkan He.

Papa Mere Jo Meri Har Baat Par Daanta Karte The..
Aaj Rote Rote Zuka Dekho Unka Bhi Sar He..

Me Janu Ye Bhi Ki Aankho Se Beh Rahe He Aansu Unke..
Par Khusi Se Zumta Hua Mere Maa Baap Ka Man He..

Kehte The Mere Bhai Ki Kash Tu Jaye Jaldi Ye Ghar Se..
Aaj Ja Rahi Hu To Ro Rahe , Najane Ab Unhe Kya Dar He..

Dekho Yaha Har Koi Muje Ab Aakhri Salam Kar Raha He..
Jese Meri Zindagi Ka Yaha Hone Wala Ye Aakhri Safar He..

Sabki Baat Kehdi Par Kisi Ne Mere Haal Na Pucha...?
Ki In Sabke Bich Kesa Mera Haal - Ae - Gujar He...?

Ek Taraf Hasi Aur Dusri Aur Aansu Beh Rahe He Aankho Se..
Sochti Hu Kitna Ajeeb Aye Khuda Ye Manzar He..

Is Ghar Ko Chhod Kar Ja Rahi Hu Apne Pyar Ke Ghar..
Khatam Hua Ek Safar , Ab Aage Dusra Safar He..

Aye Mere Yaaro Me Aaj Ye Ghar Se Ja To Rahi Hu..
Par Isi Ghar Se Juda Mera Pura Bachpan He..

Aye Dosto Ab Aakhri Salam Ki Muje Ab Jana Hoga..
Kyuki Intezar Me Bechain Wo Mera Hamsafar He..

Ab Me Uski Ho Chuki Ki Wo Hi Mera Sar Taaj He...
Ab Uska Ghar Hi Yaaro Mere Liye Mera Ghar He..

Haste Haste Ek Baar Kehdo Sab Ki Aati Rehna Yaha..
Ki Tu Jaa To Rahi Yaha Se Par Ye Ab Bhi Tera Hi Ghar He..

Aakhir Alwida Sabko Meri Aur Se Yaaro Kyuki..
Aaj Chhod Kar Jana Muje Khud Apna Hi Ghar He........@diwana

Thursday, January 17, 2013

mujhe tadpane wale

mujhe tadpane wale, tujhe bhi kahi chain nahi aaye ga...
tu bhi jaage ga saari raat, ek pal araam tujhe bhi nahi aaye ga...

jis aag mein mei jala, uss aag mein tu bhi sulag jaaye ga...
yu tarsaa hai mera dil, pyaasa tera bhi dil reh jaaye ga...

jab garje baadal, kadki bijali, sehmi ruh meri tanhai mein...
tujhe bhi mile wo hi dard iss duniye se ruswai mein...

lekin........

mohabbat ki hai tujh se yu bad-dua nahi dunga tujhe...
bewafa hi sahi tu lekin khushi ki her dua dunga tujhe...

majboori bas itni meri khwaab toota, armaan bikhre, dil aankhon ki baarish mein doob gaya...
tumhara saath kya chhuta mujh se, mera toh khuda hi mujh se rooth gaya…..@@@diwana..sourabh

Wednesday, November 7, 2012

EK BETI KA DARD...EK LADKI KI KAHANI......


zmana puchhta hai ke betiya kya dengi jo wo janam lengi...

aaj tum sab ko bata hu ke beti kya de sakti hai....
tumhari ek khushi ke liye wo kaise apni muskurahto ki bali de sakti
hai...

pyar karne ka hak sabko hota hai...
sabka dil kisi na kisi ke liye rota hai...

beta apne baap se bhi bgawat karleta hai ladki ke liye...
magar ladki ke dil me pahla pyar apne ghar walo ka hota hai...

bewafa ke naam se badnaam hoti hai...
baap ki pagdi ke liye apne pyar ko khoti hai...

magar phir bhi use koi smjh nhi pata...
apni hokar bhi beti parayi hi hoti hai...

pyar ho jata hai ispe kisi ka zor nhi chalta...
magar kismat me jo ho bas wohi hai milta...

betia maa baap ki izat ke liye apne armano ko jla deti hai...
maa baap ka naam na mitti me mile is liye umar bhar ki wo khud ko sza deti hai...

magar itne ke baad bhi betio ko wo darja nhi milta....
unki majboorio ko kio koi nhi smjhta...

betia wo hoti hai jo khud pe ilzam lekar bhi bhla karti hai...
itna karne ke baad bhi na jane kio kabhi kokh me to kabhi dahej ke liye jal ke mara karti hai...@diwana

Monday, September 24, 2012

Heart Touching Love Story........

ek waqt ki baat hai ek ladka tha banjara sa...
khule gagan me udta rahta wo panchhi awara sa...

na ghar ki thi chinta koi na apna thikana tha...

har dar par wo firta rahta tha mara mara sa...

mar pit awara gardi se use fursat nhi milti thi...
apne jaise awara dosto ke sar pe hi zindagi uski chalti thi...

magar jyada din chal na saka uska ye dhong dhtura...
ek ladki mili jiski ankho ka jadu chal gya us pe pura...

dhire dhire us ladki ko bhi bhane laga tha ye awara...
ek baar mile phir milne lage dobara dobara...

dono ke dil me khyal ab shadi ka sajne laga tha...
magar zami asman kaise ek honge ye dar sabhi lagne lga tha...

ladki ne apne baba ke aage apna sara kissa rakha...
magar baba ne ladke ko ek dam se nakara...

apni bezti sunkar ghar se nikal aaya bechara...

magar ladke ne har na mani mehnat karne laga wo...
mehanat kar ke din rat marne laga wo...

kuchh hi salo me ladke ne apna alag hi mukam bnaya...
mehanat ho to kuchh bhi hasil hojayega duniya ko smjhaya...

apni khushi manata hua ladki ke ghar jab pahucha...
dekha waha jalsa laga tha mohal tha garma garmi ka...

waha mandap saja hua tha magar dulha dulhan nhi the...
ladka itna kuchh smjh na paya sahi se...

magar andar jate dang rahgya ladki lal jode me arthi pe padi thi...
uska baap pairo me tha maa uski sar pe hath fer rahi thi...

ladke ne jate hi gili ankho se ladki ka matha chuma...
swal bhare nazro ke sath baap tarf wo ghuma...

baap ne btaya ke kafi intzar ke baad hum iski shadi kra rahe the...
nhi karegi to achha na hoga kah kar dra rahe the...

taiyar bhi hogyi thi magar na jane jaan kio dedi...
jo baat thi kam se kam khul ke to hamse kahti...

tabhi ladki ki chhoti bahan ne chithi ladke ko di...
us chithi ne ladke se sari khani kah di...

likha tha mai ab aur intzar nhi kar sakti...
magar tumhari na hone pe mai hu mar sakti...

kisi aur ka hone se achha mai duniya se hi uth jau...
tumhari na hui to ab kisi ke hath na aau...

ladka ye padhte padhte achanka ladke ke upr gir gya tha...
jab dekha sabne to achank hi wo mar chuka tha...

shadi wale ghar se aaj do lashe uth rahi thi...
unki lashe unki sachi mohabbat ki dastan kah rahi thi...

mohabbat ne ek awara ki zindagi to badli thi...
magar iske badle me do masoom jane bhi li thi.......@sourabh

Sunday, September 16, 2012

EK BAAP KI KHANI...

ye baat hai ek baap ki jo bada majboor tha...
ye baat hai ek bete ki jo jwani ke nashe me magroor tha...

ek banda tha kamane khane wala...

uske ghar tha ek nanha mehman aane wala...

khushio ki ghadi aayi...
jab dai ne aakar khbar sunayi...

mubarak ho "bansi" tu ek bete ka baap ban gya hai...
dekho dekho bansi ka sina kaise tan gya hai...

bansi ab apne aane wale kal ke khwab sjane laga...
bete ki aane ki khushi me paglo sa nachne gane laga...

dekhte dekhte waqt nikalta gya...
umar ke sath bete ka roop rang badlta gya...

bansi ki chah thi ke beta bahut padhe...
apne khandan me wo pahla ho jo itna aage badhe...

beta bhi padhne me khoob bhala chnga tha...
magar apne maa baap aur gareebi pe sharminda tha...

ek baar aisa waqt aaya ke bete ko sarkari naukri mil rahi thi...
bas usme kuchh rupyo ki kami khal rahi thi...

naukri ke liye chahiye the bete ko rupye kuchh hazar...
magar yaha to bansi ke pass kuchh na tha wo tha ek dam bekar...

beta rone laga apni kismat ko kos kar...
tu naukri karega itna kah kar nikal gya bansi kuchh soch kar....

na jane uske dimag me kya khurafat chal rahi thi...
kon se jin se layega paise na jane aisi kon c baat chal rahi thi...

uski nazro me ek seth tha bada amir magar dil ka gareeb tha...
bansi usi ke ghar chori karne nikla jo uske ghar se thoda kareeb tha...

bansi ne bhi chori badi imandari se ki...
lakho me se bas kuchh hzar churaye baki rakam chhod di...

magar badkismati se use ek naukar ne chori karte dekh liya...
use dekhte hi chor chor chila diya...

bansi bhaga waha se paiso ko sath le kar...
wo bhag gya gaow se paiso ko bete ko pakda kar...

bete ne paise dekar ek naukri dhundh li...
apni hi marzi se usne chhokri bhi dhundh li...

shadi kar ke jab aayi wo ghar to budhi maa ko tane sunane lagi...
chor tha tera pati ye kah kar chidhane lagi...

ahsan framosh beta bhi baap se nafrat kar rha tha...
udhar bansi chori ke ilzam me jail me mar rha tha...

budhhi maa bhi inke sitam sah na payi...
apne bansi ke bina wo bhi jyada din zinda rah na payi...

in kamino ne budhiya ko achhi tarah jlaya bhi nhi...
ye kisi ko bataya bhi nhi...

bansi kafi salo baad jab apne bete ko dhoondhta hua uske ghar pahucha...
sab se milunga ab mai na dukh sahunga usne man me ye socha...

jab gate pe pahucha to sina choda hogya bete ke thath dekh kar...
magar idhar to bete ke rang hi ud gye apna baap dekh kar...

usne darban se kaha ke is budde ko andar mat aane dena...
ye chor hai smbhal kar ise kuchh mat churane dena...

baap itna sunte hi mano bejan hogya...
aaj wahi beta praya hogya jiske liye baap badnaam hogya...

bansi ko maloom pada ke uski biwi bhi na rahi...
to bansi ne bhi aur na jeene ki than li...

4 din bhookha pyasa bete ke ghar ke aage raha wo pada...
magar in pathar dil walo ko uspe aayi na dya...

dekhte dekhte bansi duniya se chala gya...
bete ke aankh me ek aansu na tha uslte usne socha chlo ek bojh kam hua...

usne lash ko uthva ke gande nale me fikva diya...
bete ke rishte ko usne badnam kar diya...

na jane bhagwan kio is tarah se julam karta hai...
maa baap bhagwan hai wo har kisi ke dimag me kio na bharta hai...

aise bete bhool jate hai ke is paap ka badla unhe chukana hoga..
unhe bhi budhape me apne bete ke aage aise hi gidgidana hoga....@sourabh

Wednesday, September 12, 2012

BADKISMAT MAA BAAP KI KAHANI...

Suno suno ek kahani sunata hu abhage maa baap ki...
Badi mashakat se ki thi parvrish jinho ne apne aulad ki...

Baap kadi mehanat kar ke khoon ko paseene ki tar
ah bhata tha...
Khud ki mehanat se wo logo ke mahal banata tha...

Maa ghar ghar kaam karke do char paise lati thi...
Bete ko khoob khilati aur khub bhana bna bhookhi so jati thi...

Dono ka sapna tha ke beta padh likh kar kuchh kam kare...
Hamari to beet gyi gumnami me ye to kuchh naam kare...

Dekhte dekhte waqt guzarta gya...
Beta waqt ke sath apni raftar se badhta gya...

School tak to halat uski thik hi rahi...
Clg me jakar uski sangatee bigadti gyii...

Dost ban gye uske kuchh amir ghrane ke bache...
Jo the dil se bhi kache dimag se bhi kache...

Ye bhi unki tarah shokhiniya karne jaga...
Pahle jhoth bolta phir jab baat na bani to paise ke liye maa bap se jhagdne laga...

Maa baap paise dete gye is aas me ke kal ko beta khoob kmayega...
Hamari to kat gyi kam se kam apne dukh mitayega...

Magar bete ke to yaha alag rang the...
Sab uske karnamo ko dekh ho rahe dang the...

Sharab jua aur ladkiya uska shokh ban gyi...
Ameero ki shokhinya uske khoon me ram gyi...

Jis maa baap ne use khoon pila kar bada bnaya tha...
Dosto ko usne inhe apna naukar btaya tha...

maa baap ka vishvash tha is pe se uthne laga...
unka eklota shara tha chhootne laga...

isi gum ko jhelte huye wo dono is duniya se chal base...
is abhage ke sar pe ab undono ke saye na rahe...

sare dost bhi ab isko thukra gye...
sare shokh bhi iske murjha gye...

nashe ki lat ise pagal bnane lagi...
tanhai ise thi satane lagi..

dekhte dekhte ladka puri tarah pagla gya...
tadfa hua ek din duniya se chala tha gya...

maa baap ka dil dukhaya uski saza use bhugatni padi...
jidhar bhi gya mout uske samne thi khadi....

duniya me har gunaah ki maafi bani hai...
lekin maa baap ke dil dukhane ki koi mafi nahi...
@sourabh

EK SACCHI KAHANI.....

Kabhi kabhi apni ankho pe yakeen nhi aata hai...
Kaise koi jaan se pyara khud hi dil tod jata hai...

Aisi hi kahani mai aap sabko sunata hu...
Kaise bikhra kisi ka wajood ye aapko bata hu...

Ek ladka jisne apna sab kuchh bhoola diya apni mohabbat ke liye...
Uski mohabbat use chhod gyi kisi dusre ke liye,,,

ladka ladki ko khub ghumata tha...
Uski ek khwahish ke liye apni jaan tak lutata tha...

Kisi kaam me ladke ka man nhi lagta tha...
Har taraf use ladki ka ahsas hi thagta tha...

Ladki bhi uske pyar ka khoob fayda uthati thi...
Apne jhothe ansuo ko dikha kar ladke ko khoob rulati thi...

Na smjh uske is tamashe ko hi pyar smjh baitha tha...
Uske siva kisi aur ka nhi hoga har waqt yahi kahta tha...

Magar usko na pata tha ke kismat kya mod legi...
Jise wo jaan kahta hai wo kisi aur ke liye muh mod legi...

Akhir ladki ne use achanak bhool jane ko kah diya...
Jab wajah puchhi to bahana majboorio ka bna diya...

Kahne lagi ghar wale meri shadi kahi aur kar rahe hai...
Mujhe tumse dur jane ko majboor kar rahe hai...

Ladka bechara tootne sa laga,,,
uska rab par se bhrosa chhootne sa laga...

Ab to wo akela hi rah gya tha...
Ladki ke liye usne to apno ko bhi chhod diya tha...

Magar kisi ke smjhane pe wo ab bhi jee raha hai...
Magar andar hi andar gum ke ansu pee rha hai...

Mohabbat me sabka yahi haal hota hai...
Jitni gahri ho mohabbat dil utna rota hai...
@sourabh

Pyar ko pyar hi rahne de use badnaam na kr


Poocha mujhse meri rooh ne ki kyn tu us par apni jan neesar karta hai... 
kyn tu hota hai bechain uski ek jhalak pane ko, kyn tu us par itna marta hai...

Kaha maine meri rooh se-->>

"Sun tu bhi mere yaar ki kya khoobiyan hai...
Hai wo moorat mere khuda ki jise se mujhe mohabbat hai...
thi kal talak meri wo adat, ab mujhe uski jarurat hai...

Sunkar meri baate rooh kahti hai mujhse-->>

Na kar yun deewangi aye deewane ashiq, ishq ne bahuton ka dil toda hai...
mat bhool tu wo gadi tere dard ki, is ishq ne pahle bhi tera saath chhoda hai...

Meri aankhe hai nam, fisal rahe hai mere kadam fir bhi kahta hun main apni rooh se-->>

Beshaq chhoda ho usme saath mera, par ab thama hai us farishte ne hath mera...
hai yaqeen us par khuda ki khudaai jaisa, hogi har shab sang me hoga sang me har roz savera...

Muskra di meri ye bat sunkar meri rooh ab to kahne lagi fir mujhse-->>

Teri mohabbat ko mera salam aye deewane aashiq ki ab tujhe tera pyar milega...
chahega jo toot kar tujhe khud se bhi jyada ab tujhe wo sacha dildaar milega...

Sourabh


Ek gareeb ladke ki kahani..

Ek gareeb ladke ki kahani.....must read...nd plz tag ur friends......kasur kya hai mera kis bat ke liye mei gunahgar hu...garibi hai meri sazaa uske liye kya mai jimedarhu....?

khelne ki umar mei mujhe majdur bana diya...
mere pita ne mera sauda ek bazar mei ma se bin bole kara diya....
char bhai aur do behne hai meri unki liye ma ne teen roti banayi hai.....
ma ki mamta toh nahi lekin uske jhadu se mar jarur khai hai.....
agar do rupaye kam kamaye hai toh pita ne bhi janwaro si meri pitayi lagayi hai....
padhne ko ek akshar nahi ata hai, gareeb hu
mei yahi dard mujhe khata hai.....
ek din mere pas bhi bangla hoga ek din mere pas bhi motar car hogi....
ye hi sapne dekh ke mai har rat neend mei muskurata hu....
ankhe khulti hai toh dard bhari haquiqat se mai takra jata hu.....
dhul mei meri har subah ki shurwat hoti hai....
har sapna reh jata hai adhura aur andhero mei ujalo ki bat hoti hai.....
duniya ka har insan humse katrata hai....
daya to hoti hai unke chehro pe, par koi apni saaf duniya chod ke humari gandgi saf karne nahi ata hai.....
kya hume sahara dena bhi koi gunah hai....
ya humare liye kuch na karna jati dharam ki
saugat hai.....
neechi jati hai log hume sab bulate hai....
par ye unch neeche tay karne wale log khud bhagwan ke gunahghar kehlate hai.....
bheekh ke paise nahi hume pyar chaiye.....
ma ki mamta aur pita ka dular chaiye....
kuch akshar hum bhi padh paye aisa hume sansar chaiye....
khilono se hum bhi khele bus hume jindgi mei
aise palo ki barsat chaiye.........
@sourabh

My Fav. Poem Plz MUST READ.......

Poem Dedicated For All The Boys Who Fell in Love With The Girls.....And Girls Actually Tell them They Are Just Friends......So Lets Start This Emotional Attyachaar Poem For All The Ex Girls Out There From 
All the Heart Broken Lovers....

Poem Name is "Meri Ex Girlfriend"
Shudh Hindi mein Bola Jaaye Toh "Mere Dosto Ki Bhojai" ........

College Ka Woh Doosra Din Tha , Fsana Meri Kismat Mein....
Uski Friend Aai Nahi thi College , Aa Ke Woh Baithi Mere hi Bagal Mein....

Main Bhi Ho Gaya Khush, Ab Jaise Hi Maine Baat Chalayi....
Baaton Se hi Pata Chala Woh Toh B.TECH Kerke hai aayi....

Maine Kaha I am An Engniyar, Sunke Uske Chehre Pe aai Jo Muskaan....
Bas Tabhi Maine Thaan Liya, Bete Yehi Banayegi Tere Dil Mein Pyaar ka Makaan....

Uski Baat Mere Saath, Hui Itni Speed Mein Interaction.....
Ki Ek Hi Hafte Mein aa Gaye Airtel ke Do naye Connection.....

Dosto Ne Bola Tu Hai Dude , Aate hi Ladki Kaise Pata Gaya.....
Hume Toh lagta tha Tu Fishadi , Aisa Karishma Kaise Dikha Gaya....

Kuch hi Dino Mein Aayi Freshers Party, Nashe Mein maar dia Maine Use Propose....
Bas Wahi Ho Gayi Galti Mere Yaaro, Aaj Tak kerta hu Us propose ka afsoos....

Waise Toh Hoon main Chaalu Insaan , Par Woh mere Se badi Khiladi Thee....
Woh kehte hain na LOVE IS BLIND , Shayed Mujhe bhi wohi Bimari thee....

Uski Senti Baatein Sunke Main Toh Fisalta hi Jaa Raha Tha,
Woh Khati thee Mc Donald ka Burger Aur Main kasme Khaata Jaa Raha tha...

Bekaar Sadi Movies Bhi Do Do Baar Dikhaya Kerti Thee,
Jab Ticket Lene Ki Baari Aaye ..Toh Washroom mein Ghus Jaaya Kerti Thee.....

Jaanu Yeh Khilao, Jaanu Yeh Dilao , Jaanu Ne Jaan Nikal Di Thee Meri,
Driver Woh Bhi Without Salary ki Naukri Lag Gayi Thee Meri.....

Agar Jhoot Bolne Ka Milta Inaam , Toh Noble Prize Jeeta Tha Usne,
Aur Agar Pyaar Mein ugte Hote Jo Singh .. Toh Baara Singha Ban Jaata Main....

Jald Hi Aaya Mere Lutne ka Din ...Uska B-Day Jo aa Gaya Tha,
Apne Liye Kerta Tha Soch Ke Kharcha ... Uske Liye Credit Card Chala Raha Tha...

Zyada DUDE Banne Ka Nuksaan Toh Mujhe Ab Samjh Aa Raha Tha,
Kyonki SHOPPING, MOVIE, PARTY Ka Kharcha 10 Hazaar Paar Jaa Raha Tha....

Maine Bhi Socha Chal koi Nahi ... Pyaar Mein Yeh Sab Chalta hai,,
Par Yeh Nahi Jaanta Tha ... Aisa Pyaar Zyada Din nahi Chalta Hai.....

Ab Ek Din Pata Chala Uske Toh Chal Rahe Hain AUR TEEN AFFAIR...
Koi Le jaata hai Car Mein LONG DRIVE,Toh Koi Le Jaata hai BIKE PE TRADE FAIR...

Jaise Taise TOOTE DIL se maine DOSTO ko poora kissa Bataya
Kuch Ne Toh Mere Saath GUM baanta Baakiyon Ne JAM ke Mazak BANAYA

Yehi Soch Ke Chup Raha Ki FUTURE KE LIYE kuch lesson Mil Gaya,
Mere Saath Jo Hua So Hua .. Dosto Ko Toh ENTERTAINMENT mil Gaya....

Us do mahine ki LOVE STORY ka ho gaya tha TRAGIC END ,
Pyaar ke naam pe Timepass Bas yehi hai aaj ka TREND....

Us din Samjh Aaya Mujhe PYAAR mein insaan Kitna LAACHAAR hai,
Sarkaar Aur Desh hi Toh Chodo yahan Toh PYAAR mein bhi BHRASTACHAAR hai...

Aakhir ki Chaar Lines Hain Zara Gaur Se Sunna Kaam Aayengi.......

Sach Kehta hu Mere Dosto MAA KASAM KHARCHA bahut kara Gayi,
Maine Lena Tha IPHONE Woh bhi Char Mahine Delay Kerwa Gayi....

Esi Liye Kehta Hu Jaldbaazi mein nahi Dekh Ke Soch ke Samjh ke Pyaar Karo,
Aur Jiskaa Pyaar Samjh Na Aaye Use Door Se Namaskaar Karo...........:)

Ek Heart Touching Love Story....Must Read....Nd Plz Tag Ur Friends Plz Yar.........

ek ladka tha ek ladki thi...
ladki ladke pe bahut marti thi...

ladke ko bhi ladki se bepanah pyar tha...
ladka uske liye sare jag se ladne ko taiyar tha...

dono ka pyar din ba din badhta gya...
ladke pe ladki ka khoomar chadhta gya...

magar badkismati ki ghadi aagyi...
dono ki zindagi me mayusi chha gyi...

ladke ki gareebi ne use ladki ka hone na diya...
ladki ke maa baap ne dono ko ek dusre se dur kar diya...

ladki ke ghar walo ne wo shahar hi chhod diya...
ladke ne bhi duniya se mano nata tod liye...

koi kahta ke ladki ne shadi karli koi kahta ke tujhe dhokha diya usne...
magar ye to malik hi janta tha kiske liye kya kiya kisne...

ladke ne bhi kuchh karne ki thani...
sochne laga kio bekar jaye meri jwani...

usne bhi din raat khoob mehnat ki...
magar toot jata tha jab ladki ki use yaad aati thi...

kosne laga tha wo apne pyar ko...
duniya ki baato me aakar maan liya tha bewafa apne pyar ko...

dekhte dekhte pal saalo me badal gye...
idhar ladke ke sitare bhi smbhal gye...

bhikhari sa jo kabhi tha aaj caroro me khelne laga...
khuda ne uspe apna karam dikha diya...

phir ek din kisi se maloom pada ke us ladki ka pariwar isi shahar me hai...
usne bhi socha kio na ladki ko sharminda karu aur use neecha dikhau...

man me itne din ki aag snjoye wo ladki ke ghar pahuch gya...
ladki ka baap ladke ki thhath ko dekh kar dang rah gya...

bade rob se puchh bataiye aapki bewafa ladki kaha rahti hai...
kis se shadi huyi aur aaj kal kitni mauj me rahti hai...

ladki ke baap ne nazre neeche jhuka sirf itna hi kaha...
hame maaf kardo hamse galti huyi jo tumhare pyar ko kuchh na smjha...

magar beti hamari bewafa nhi hai...
galat hai wo bate jo tumne kahi hai...

us din jab tumse juda kar ke hum use ghar ko laye....
na jane usne ro ro kar hame kitne fariyad sunaye...

suni na uski ek use kamre me band kar diya...
uski shadi ke liye ladka bhi pasand kar liya...

magar beti hamari tumse juda hona na chahti thi...
aur bhaag kar tumhare sath hmare apne maa baap ka vishvash khona na chahti thi...

isi liye use ek hi tareeka sujha...
khudkhushi karli uske paas rasta tha na duja...

isi sharmindagi ko chhupane ke liye hamne shahar se farar hogye...
uske jaate hi hamre upar na jane kitne gum swar ho gye...

ladke ke neeche se maano zameen hi nikal gyi...
daudti huyi kismat ek pal me fisal gyi...

jitna bhi kosa tha apne pyar ko uspe wo afsoos jtane laga...
bahte huye ansuo ko sabki nazro se churane laga...

ghar se hara hua sa nikal do kadm chal ke gir pada tha wo...
kisi ne nabaz tatoli to dekha mara pada tha wo....

apni mashook ka gum use bardast na huya...
ek baar phir muqqadar ek ashiq ke sath na hua....


@sourabh

wo nasmajh ladki...

uski fikar karta hu...
galtio pe dant deta hu...

lekin wo nasmajh ladki...
meri fikar ko bandish smjhti hai...

kash wo mere pyar ko smjhe...
meri baat ko maane...

khud ka khyal wo rakhe...
bas itni c khwahish hai...

mai dushman nahi tera...
tere bhale ke liye dantata hu...

tu khud ko chott deti hai...
mai andar hi andar tdfta hu...

mai ye nhi kahta ke tu khyal kar mera...
bas dekhbhal kar khud ki bas itni c khwahish hai...

teri khushio ke aage qurbaan zindgi meri...
iss baat ko agar smjhe to phir kabhi na roothegi.....
@sourabh